Panthera tigris tigris
विन्ध्य की परम्परा और संस्कारों का संवर्धन

जनरल बिपिन रावत ( 1958–2021) भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ( CDS) थे , जिन्होंने थल , नौसेना और वायुसेना के समन्वय को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली। चार दशक लंबे सैन्य करियर में वे आधुनिक भारतीय सेना के रणनीतिक बदलाव और संचालन सुधारों के प्रमुख चेहरे बने।
मुख्य तथ्य
जन्म: 16 मार्च 1958, पौड़ी गढ़वाल , उत्तराखंड
सेना में प्रवेश: 1978, 11 गोरखा राइफल्स
सीडीएस नियुक्ति: 2019 में भारत के पहले रक्षा प्रमुख बने
मृत्यु: 8 दिसंबर 2021, कुन्नूर (तमिलनाडु) में हेलिकॉप्टर दुर्घटना
सम्मान: परम विशिष्ट सेवा मेडल , अति विशिष्ट सेवा मेडल सहित कई सैन्य अलंकरण
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
रावत का जन्म एक सैन्य परिवार में हुआ ; उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत थे। उन्होंने देहरादून के कैंबरीन हॉल स्कूल , शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल और भारतीय सैन्य अकादमी से शिक्षा प्राप्त की , जहाँ उन्हें " Sword of Honour" से सम्मानित किया गया। बाद में उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से एमफिल और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से पीएचडी की ।
सैन्य करियर
जनरल रावत ने जम्मू-कश्मीर , पूर्वोत्तर भारत और चीन सीमाओं पर कमान संभाली। 2015 में उन्होंने म्यांमार में सीमा पार आतंकवाद-रोधी अभियान का नेतृत्व किया और 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक में अहम भूमिका निभाई। वे 2016–2019 तक थलसेना प्रमुख रहे और बलों के आधुनिकीकरण तथा "थिएटर कमांड" संरचना की नींव रखी।
विचार और नेतृत्व
रावत अपने स्पष्ट , व्यावहारिक दृष्टिकोण और राष्ट्रहित केंद्रित रणनीतिक सोच के लिए जाने जाते थे। वे सीमावर्ती क्षेत्रों में आक्रामक सैन्य रुख , आतंकवाद-विरोधी नीतियों और नागरिक-सैन्य सहयोग पर बल देते थे।
निधन और विरासत
8 दिसंबर 2021 को Mi-17 V5 हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी और उनकी पत्नी मधुलिका रावत की मृत्यु हो गई । 2022 में भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश के किबिथू गैरीसन का नाम “ जनरल बिपिन रावत मिलिट्री गैरीसन ” रखा , जहाँ उन्होंने कभी कमान संभाली थी । उनका योगदान भारतीय रक्षा ढांचे के एकीकृत दृष्टिकोण की आधारशिला माना जाता है।